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Prarambhik Phalit Jyotish (Hindi)

Prarambhik Phalit Jyotish (Hindi)

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  • Author: Dr. Manoj Kumar / Dr. Sushil Agarwal
  • Published By:Alpha Publication
  • Language: Hindi
  • Binding: Paperback
  • Year of Publication:2019
  • ISBN No: 3278586123 , 9783278586124
DESCRIPTION

Prarambhik Phalit Jyotish (Hindi)



म्रत्येक्व जन्मड्डली के ग्रह जातक के जीवन पर दो प्रकार का ग्रभाढ़ डालते हैं।
उनम रने होता स्थायी तथा दूसरा सामयिका जन्मकालिक ग्रहो का जातक

॰ पु -सामाविक स्तर, उसकी शारीरिक बनावट, व्यक्तित्व, स्वभाव तया
सस्कारो हो विशेष सबध रहता है उक्ति बही ग्रह अपने दशाकाल में जातक क
सावन में समय-समय पर उसक उत्यानब्वपतन, उन्नति-अवनति, स्वास्थ्य-हुंमृक्षे
डानिन्पाभ, यश-अपयज्ञा, जीबन-पुरम्। आदि इष्ट-अनिष्ट अचस्मृदृहुँआं को
करड़े। में सहायक या बाधक ही जात है अथवा इनकी सूचना देते । जीवन को
हेन अवस्थाओं को साधारणतया ब्रोल्यचाल की भाषा में ज़।तक के है अच्छे या हैं

जाधि है कहा जाता है। अच्छा या र दिनो को जानने के लिए फलित ज्यातिष

अनक पद्धतिया प्रचखुत है जिदृहूँ नक्षत्र, राशि, दशा, गोचर तत्व आदि के

आधार पर फलनिर्णय मृ जाते ३ तथा घटता के सटीक रूप सै घटित होने की
अवधि निर्धारित की जाती हैं।

आपके समक्ष प्रस्तुत इस पुस्तक में फलित करने के सभी आवश्यक अवयवों का
विस्तार से वर्णन किया गया है जिसका ज्ञान प्राप्त करना ल्यनैतिष के सभी
षित्सारिश्रहँयो के आबश्यकृ है। यद्यपि कि हुस्न पुस्तक मृ सभी आचश्यबहुं
अवयवों का र्भतू टिहृलह्वाम्न। दिया राया है _फिर हुँमौ गभीरफलादमृ। कै
दृष्टिकोण रने शिक्षार्थियों की ओर भी विष्टाबू सिद्धग्लो क्त कूनीको क्यू अध्ययन
करना पाया जो हमारी दूसरी पुस्तक ' बृहत्फलित है म दी हुईं हा
इस पुस्तक काँ कल 1-4 अध्यायों में विभाजित किया गया है जिसमें फलित के
रवृमी आवृश्यक सिंद्धृप्त समाविष्ट है। पाल अध्याय मे ग्रहो की उत्पत्ति हैं
सबधित पौराणिक एल वैज्ञानिक ब्रष्ट्रव९मा, ज्योतिष का महत्व आ है तो दूसरे
अध्याय ज्योतिषी के गुग्रादृधर्मं एब कर्मफल सिद्धांत का विवेचन : । हसी प्रकार
तीय अहैन्याय में भचकैएब भाव संबंधी जानकारी, चतुर्थ अध्याय हूँ हुँब्बेग़स्नेज्ञा फुल
, पचम अध्याय हैं ग्रह बिचार, षष्ठम अध्याय में खड्डा भावो में नचग्रहुं। बहे
फल, सप्तम अध्याय में राशि परिचय, अष्टम् अध्याय विभिन्न लम्बो [ ग्रहो
का शुभाशुभ विचार, नयमृ अध्याय में नक्षत्र विचार, दज्ञाम अध्याय में योरा
विचार, एकादश अहुँध्याय में फ़लादेड़। को निधि, द्वादश अध्याय में गोचर विचार,
त्रयोदश अध्यायघुने दशा विचार तथा चतुर्दशा अध्याय में सामान्य फलित के
उदाहरण वर्णित है ।


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